Birthday Sms > Birthday SMS - HindiJokes.Mobi
Himanshu Gupta: 5 days ago
मेरे घर में तो पहले ही GST लगी हुई है। बीवी 1600 का सूट लाती है और 2000 का लाई हूँ बताती है।
Himanshu Gupta: 7 days ago

एक औरत अपने आशिक के साथ घूम रही थी
इतने में उसका पति आ गया और उसके आशिक को पीटने लगा ,

औरत –
“मार साले को, अपनी बीवी को घुमाते नहीं,
दुसरो की बीवी को घुमाने ले आते है।”

इतने में आशिक को जोश आया और वो उसके पति को पीटने लगा…

औरत –
“मार साले को… ना खुद घुमाने ले जाता है और ना किसी और को घुमाने देता है”!

“जय महिला विभाग की”
Himanshu Gupta: 7 days ago

आजकल घर मे बीवी भी बात-बात में GST बोलने लगी है।
घर में कैसी भी बहस चल रही हो वो GST बोल कर बहस को ख़त्म कर देती है।

तंग आकर मैंने पूँछ ही लिया: “ये तुम बात करते-करते बीच में ही GST बोल कर चल देती हो…क्या मतलब है तुम्हारा ??”

और उसने जो जवाब दिया तो मैं सर पकड़ कर बैठ गया।

G – गलती
S – सिर्फ
T – तुम्हारी है
Himanshu Gupta: 7 days ago

पत्नी: अजी सुनिए, ये Complete और Finish में क्या फर्क होता है? पति: अगर शादी सही लड़की से हो गयी तो समझो ज़िंदगी Complete और अगर गलत लड़की से हो गयी तो समझो कि ज़िंदगी Finish!
Himanshu Gupta: 7 days ago

बचपन में मास्टर जी से हाथ में इतने डंडे खाएँ हैं कि, हाथों में Girlfriend वाली लाइन ही मिट गई है।
Himanshu Gupta: 7 days ago

बहुत कोशिश की लेकिन Google Map अभी तक नहीं बता पाया कि, प्यार हमें किस मोड़ पर ले आया।
Himanshu Gupta: 7 days ago
मोहब्बत और कुछ करे या ना करे, मोबाइल ज़रूर साइलेंट करवा देती है।
Himanshu Gupta: 8 days ago

सिलसिला का बहुत सुंदर गाना

मैं और मेरी कमाई,
अक्सर ये बातें करते हैं,
टैक्स न लगता तो कैसा होता?
तुम न यहाँ से कटती,
न तुम वहाँ से कटती,
मैं उस बात पे हैरान होता,
सरकार उस बात पे तिलमिलाती ,
टैक्स न लगता तो ऐसा होता,
टैक्स न लगता तो वैसा होता…
मैं और मेरी कमाई,
“ऑफ़ शोर” ये बातें करते हैं….

ये टैक्स है या मेरी तिज़ोरी खुली हुई है ?
या आईटी की नज़रों से मेरी जेब ढीली हुई है,
ये टैक्स है या सरकारी रेन्सम,
कमाई का धोखा है या मेरे पैसों की खुशबू,
ये इनकम की है सरसराहट
कि टैक्स चुपके से यूँ कटा,
ये देखता हूँ मैं कब से गुमसुम,
जब कि मुझको भी ये खबर है,
तुम कटते हो, ज़रूर कटते हो,
मगर ये लालच है कि कह रहा है,
कि तुम नहीं कटोगे, कभी नहीं कटोगे,……..

मज़बूर ये हालात इधर भी हैं, उधर भी,
टैक्स बचाई ,कमाई इधर भी है, उधर भी,
दिखाने को बहुत कुछ है मगर क्यों दिखाएँ हम,
कब तक यूँही टैक्स कटवाएं और सहें हम,
दिल कहता है आईटी की हर रस्म उठा दें,
क्यों टैक्स में सुलगते रहें, आईटी को बता दें,
हाँ, हम टैक्स पेयर हैं,
टैक्स पेयर हैं,
टैक्स पेयर हैं,
अब यही बात पेपर में इधर भी है, … और उधर भी है